मेरे प्रिय अध्यापक
मेरे प्रिय अध्यापक
जितना आसान होता है किसी से ये पूछना की, तुम्हारे प्रिय अध्यापक कौन हैं?
उतना ही मुश्किल होता है हम विद्यार्थियों के लिए इसका उत्तर देना।
प्रत्येक अध्यापक का अपना एक निराला ही ढंग होता है अपने ज्ञान को प्रदर्शित करने का, विद्यार्थियों को पढ़ाने का, उन्हें समझाने और समझने का। कोई अध्यापक व्यव्हार में कुछ शांत होते हैं तो कोई थोड़े से सख्त होते हैं। विद्यार्थी को शिष्टाचार सिखाने व अनुशासित बनाने हेतु अध्यापक के ये दोनों ही गुण अनिवार्य हैं।
हर अध्यापक चाहता है कि उसका विद्यार्थी जीवन में आगे बढे और सफलता के शिखर पर वह सबसे आगे और सबसे ऊपर हो। हम अध्यापकों में भेद नहीं कर सकते क्योंकि, प्रत्येक अध्यापक स्वयं में खास होता है। अध्यापक की दी हुई शिक्षा जीवन के प्रत्येक पग पर काम आती है।
ये अध्यापक ही होते हैं जो हमारे जीवन से जड़ता के अन्धकार को दूर कर जीवन को ज्ञान के प्रकाश से प्रज्वलित करते हैं।




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