"विदाई"
विदाई"
विदाई शब्द सुनते ही आँखें नम सी हो जाती हैं। फिर चाहे विदाई किसी की भी हो बेटी की या विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की या अध्यापकों की। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, इसलिए वह अकसर समूह में रहना ही पसंद करता है। जब वह अपने समूह से बिछड़ता है तो भावुक हो जाता है। सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि वह समूह भी भावुक होता है जिसके साथ वह मनुष्य जुड़ा होता है।
मेरी मानो तो सबसे ज्यादा भावुक करने वाला पल विद्यालय से विदाई का होता है। बचपन से ही हम विद्यालय से जुड़े होते हैं एक परिवार की भांति और विद्यालय से एक खास तरह की अपनत्व की भावना जन्म लेती है जो जीवनपर्यन्त हमें विद्यालय से जोड़कर रखती है। इसलिए तो जब विद्यालय से विदा लेने की घड़ी आती है तो सबकी आँखें नम हो जाती हैं। फिर चाहे कोई छुपाये या जाहिर करे। यहाँ तक की कोई अध्यापक भी जब विद्यालय से विदा लेता है तो उसका हृदय भी करुणा से भर जाता है। ये क्षण प्रत्येक विद्यार्थी और प्रत्येक अध्यापक के जीवन में आते हैं क्योंकि उस क्षण के बाद वह विद्यार्थी/अध्यापक अनेकों यादें छोड़ जाता है और साथ ही कई सारी यादों की पोटली अपने साथ ले जाता है। इसलिए तो विद्यालय से जुड़ी यादें सदा ही मधुर और हृदय विदारक होती हैं और जीवनपर्यन्त स्मरण रहती हैं।
हमारी यादों के क्षणों को वर्तमान की भांति किसी उपकरण में हम कैद तो नहीं कर पाए लेकिन, अपने हृदय में अवश्य ही आज भी कैद किये हैं और नम आँखों के साथ आज भी स्मरण करते हैं।


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