74वाँ स्वतंत्रता दिवस

74वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ
"15 अगस्त 1947", वह तारीख जब हमें वर्षों की गुलामी की बेड़ियों से आज़ादी मिली। इस आज़ादी की लड़ाई में हमने अपने कई स्वतंत्रता सेनानियों को खोया है, तब जाकर हमें कहीं आज़ादी मिली है। उन सभी सेनानियों ने अपने कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन किया और राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। अब कर्तव्य के निर्वाहन का समय हमारा है। हमारे कन्धों पर "भारत" राष्ट्र की बागडोर की जिम्मेदारी है।
अब प्रश्न उठता है, क्या हम अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं? क्या हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं? क्या हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के 'सपनों के भारत' के निर्माण में सफल हुए हैं?
हम स्वयं अपने जहन में झांककर देख यह प्रश्न पूछ सकते हैं कि, जिस आज़ादी के लिए हमारे सेनानियों ने बलिदान दिया है, क्या हम वास्तव में उसके हक़दार हैं?
अतीत में जो हो चुका उसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता है परंतु, हम आने वाले भविष्य को तो परिवर्तित कर सकते हैं। यदि प्रत्येक नागरिक निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन करे तो ही राष्ट्र के भविष्य को उज्वल बना सकते हैं। "भारत" राष्ट्र के नागरिक होने के नाते प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य बनता है कि निस्वार्थ भाव से राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें और उन सेनानियों के स्वप्न को पूरा करें जिन्होंने राष्ट्र का गौरव बढ़ाया और राष्ट्र को गैरों की सत्ता से मुक्त किया।
आओ मिलकल कौमी एकता को बढ़ाएं और अपने राष्ट्र को सफलता के शिखर पर पहुँचाने की शपथ लें और अपने तिरंगे को बुंलदियों के शिखर पर लहरायें। अपने सेनानियों, सेना के जवानों, किसानों,स्वास्थ्य कर्मियों और अपने सफाई कर्मचारियों को हृदय से नमन करें और शपथ लें आजीवन इनका सम्मान करेंगे।
जय हिंद
वंदे मातरम।




No comments