सहायता जरूरतमंदों की प्रत्येक मनुष्य ने जीवन में कितनी ही बार दूसरों की सहायता की होगी। जाहिर सी बात है हर कोई करता है। प्रत्येक प्राणिमात्र की सहायता करना ही तो वास्तविकता में मानवता का धर्म है और प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य होता है कि वह पूर्ण निष्ठा के साथ अपने इस धर्म का निर्वहन करे। धर्म क्या है- वह जो धारण किया जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मानवता के कर्तव्य को धारण करना ही धर्म है। क्या है मानवता का कर्तव्य?- प्रत्येक जरूरतमंद प्राणी की सहायता करना। धर्म मनुष्यों में भेद नहीं करता अपितु वास्तविक धर्म तो मानवता का पाठ पढ़ाकर प्रत्येक मनुष्य को एक-दूसरे से जोड़ता है। समाज के इस सोपान में प्रत्येक मनुष्य अलग-अलग क्रम में खड़ा है। किसी के पास आवश्यकता से अधिक संसाधन हैं तो किसी के पास संसाधनों की इतनी कमी है कि जीवन निर्वहन करना ही चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इन परिस्थितियों में जब कोई मनुष्य, मानवता के अपने कर्तव्य का निर्वाह करता है तो प्रसन्नता से मन गद-गद हो जाता है। "विक्रम सिंह नेगी" ग्राम 'चटोली' (पट्टी हिन्दाव, टिहरी गढ़वाल) भी उन्ही मनुष्यों की गणना में आते हैं जो अपने कर्तव्य को भली भांति समझते हैं। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले विद्यार्थियों की सहायता कर वे अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं और विद्यार्थियों को आगामी शिक्षा हेतु प्रोत्साहित करते हैं। इस प्रकार के कार्यों से न जाने कितने मासूम चेहरे खिल उठते हैं। इनका उदहारण अकेला एकमात्र नहीं है बल्कि, इनके जैसे कई और उदहारण अन्यत्र भी मौजूद हैं जो इस प्रकार की सहायता कर मानवता का पाठ पढ़ाते हैं।
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