सफर हमारे विद्यालय का
सफर हमारे विद्यालय का
प्रत्येक वस्तु/प्राणी अपने प्रारंभिक आकार से अंतिम आकार में ढलने तक का सफर तय करती/करता है। फिर चाहे वह सजीव हो या निर्जीव। मनुष्य भी जन्म लेने से पूर्व भ्रूण से शिशु के आकार तक का सफर तय करता है।
जब इमारत बनती है तो कुछ इसी प्रकार निर्माणाधीन इमारत भी विकास का सफर तय कर अपने अंतिम स्वरूप तक पहुँचती है।
इसी भांति हमारे विद्यालय की इमारत, शिक्षा के स्वरूप, विद्यार्थी आदि विकास के सफर पर अग्रसर हैं।
प्रारम्भ में जब विद्यालय का निर्माण हुआ तो इमारत का एक सूक्ष्म स्वरूप तैयार हुआ। संसाधनों की कमी के चलते समकालीन विद्यार्थियों ने भी इमारत के निर्माण में पूर्ण निष्ठा से अपना भरपूर सहयोग दिया और इस प्रकार इमारत का प्रारंभिक स्वरूप बनकर तैयार हुआ। भूतपूर्व अध्यापकों द्वारा वर्तमान में भी इन विद्यार्थियों के कार्य को सराहा जाता है। धीरे-धीरे समय की धारा के प्रवाह के साथ इमारत में निर्माण कार्य प्रगति करता रहा जो वर्तमान में भी कार्यरत है।
वर्तमान में इमारत काफी बड़े क्षेत्र में फैली है जिसमें विद्यार्थियों के लिए अध्ययन हेतु कई कक्षों की व्यवस्था है। साथ ही स्वछता और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए शैचालय एवं पीने योग्य स्वच्छ पानी की व्यवस्था भी विद्यालय में उबलब्ध है।
विद्यालय में एक बड़ा मैदान भी बनाया गया है जिसमें विद्यार्थी क्रिकेट, वालीबॉल, कबड्डी, खो-खो आदि कई प्रकार के खेल खेलते हैं। साथ ही विद्यालय में समय समय पर "खेल महाकुम्भ" का भी आयोजन किया जाता है और खेल में रूचि रखने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाता है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रत्येक वर्ष खेल के क्षेत्र में विद्यालय का नाम रोशन कर विद्यालय की गरिमा को बढ़ाते हैं।
आशा है विद्यालय इसी प्रकार प्रगति करता रहे एवं भविष्य में अन्य विद्यालयों के लिए एक आदर्श की भांति उभरे।





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